बगोदर के 5 मजदूर नाइजर में बंधक, जयराम ने हेमंत सरकार की संवेदनहीनता पर सवाल उठाए। प्रवासी मजदूरों की समस्याओं को लेकर सरकार की नीतियों पर निशाना।
Jayram on Migrant Crisis रांची: झारखंड विधानसभा के चल रहे शीतकालीन सत्र में प्रवासी मजदूरों की बदतर स्थिति एक बार फिर जोरदार तरीके से गूंजी। बगोदर से विधायक जयराम महतो ने हेमंत सरकार को कड़ी नसीहत देते हुए कहा कि राज्य के प्रवासी मजदूर लगातार संकट में हैं, लेकिन सरकार और उसके विभाग संवेदनशीलता नहीं दिखा रहे।
Jayram on Migrant Crisis
उन्होंने बताया कि बगोदर के पांच मजदूर अभी भी नाइजर के आतंकियों के कब्जे में फंसे हैं, और उनके परिवारों के पास न राशन है न मदद। परिजन अब विधायकों से गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री से मिलवाया जाए। जयराम ने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और राज्य सरकार को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए।
Key Highlights:
बगोदर के 5 मजदूर अब भी नाइजर के आतंकियों के कब्जे में, परिजन मदद को परेशान
विधायक जयराम ने मुद्दा उठाते हुए सरकार की संवेदनहीनता पर सवाल किए
सऊदी अरब में झारखंड के एक मजदूर का शव 50 दिनों से बिना प्रक्रिया के पड़ा
जयराम बोले, प्रवासी मजदूरों की पीड़ा बार-बार रखते हैं लेकिन विभाग कार्रवाई नहीं करता
सरकार की सात गारंटियों और कार्यशैली पर जयराम ने कहा कथनी-करनी में बड़ा अंतर
Jayram on Migrant Crisis
जयराम ने यह भी खुलासा किया कि झारखंड के विजय कुमार का शव सऊदी अरब में पिछले 50 दिनों से पड़ा हुआ है, लेकिन सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं की गई। उनका कहना था कि प्रवासी मजदूर झारखंड की आर्थिक रीढ़ हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है।
उन्होंने विधानसभा में उठाए जाने वाले मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि गढ़वा, पलामू, चतरा समेत कई इलाकों के लोग रोज समस्याएं लेकर आते हैं। विधायक के रूप में वे निवेदन बनाकर सदन में जमा करते हैं, लेकिन कई विभाग समय पर जवाब तक नहीं देते। ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई जरूरी है।
Jayram on Migrant Crisis
जयराम ने कहा कि पलायन राज्य का सबसे बड़ा और पुराना मसला है, और विधायक बनने के बाद से उन्होंने अपने चार-पांच प्रखंडों का डेटा जुटाया है जिसमें प्रवासी मजदूरों की संख्या 70 से 75 प्रतिशत तक निकलती है। उन्होंने कहा कि वे हर सत्र में प्रवासी मजदूरों से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे।
Jayram on Migrant Crisis
सरकार की सात गारंटियों पर सवाल उठाते हुए जयराम ने कहा कि सरकार की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। उन्होंने दावा किया कि जमीनी स्तर पर गारंटी योजनाओं का असर बहुत कम दिखता है।
इधर, जयराम ने अपनी हाल की 180 किलोमीटर लंबी पदयात्रा को बेहद सफल बताया। कड़कड़ाती ठंड के बावजूद भारी संख्या में लोगों की उपस्थिति को उन्होंने क्षेत्र की जनता का भरोसा बताया।
Jayram on Migrant Crisis
जयराम ने कहा कि वे प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा, पलायन रोकने की नीति और विदेशों में फंसे मजदूरों की सुरक्षित वापसी जैसे मुद्दों को सदन में तार्किक तरीके से उठाते रहेंगे। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ मजदूरों के जीवन से जुड़े विषयों पर त्वरित कार्रवाई करे।


















