खान सर का वीडियो देख कर मजदूर की बेटी बनी दारोगा

Aurangabad– मजदूर की बेटी बनी दारोगा – “कहो ना खुदा से कि वह लंगर हटा ले, मैं तुफां की जिद देखना चाहता हूं”

इस कहावत को सही चरितार्थ किया है बारुण थाना क्षेत्र के जनकोप गांव निवासी एक

दैनिक मजदूर दशरथ बैठा और आशा कार्यकर्ता पुष्प माला की बेटी शशि कुमारी ने.

कुछ कर गुजरने की इच्छा शक्ति और सफलता का जुनून से शशि को आखिरकार उसकी मंजिल मिल ही गयी.

तमाम संघर्षों के बावजूद वह ए.एस.आई की परीक्षा में अपना परचम लहरा ही दिया.

मजदूर की बेटी बनी दारोगा : शशि कुमारी की सफलता से आह्लादित है पूरा गांव

मजदूर की बेटी शशि कुमारी की इस सफलता से आज पूरा गांव आह्लादित है.

ग्रामीण एक दूसरे को बधाइयां दे रहे हैं और गांव ही क्यों, उसकी सफलता से पूरे प्रखंड के युवाओं को संदेश गया है.

 शशि ने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के ही सरकारी विद्यालय से पूरी की, जबकि हाईस्कूल

की पढ़ाई कन्या उच्च विद्यालय और इंटर तथा स्नातक किशोरी सिन्हा महिला कॉलेज से.

स्नातक करने के दौरान ही शशि ने अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए यूट्यूब का सहारा लिया

और उसके माध्यम से दारोगा की प्रतियोगिता को कैसे क्रैक किया जाय, उसके तरीके खोजने लगी.

इसी दौरान यूट्यूब में उसे खान सर के कई वीडियो मिले, जिसका अनुसरण करना शुरू

किया और शहर के ही एक कोचिंग संस्था से अपनी तैयारी में जुट गई.

शशि का बड़ा भाई भी काफी संघर्षों के बाद रेलवे में इंजीनियर है और उसकी बड़ी बहन भी प्रतियोगी तैयारी में जुटी हुई है.

अपनी सफलता का सारा श्रेय अपनी मां पिता को देते हुए शशि ने बताया कि मंजिल उन्ही को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है.

रिपोर्ट- दीनानाथ तिवारी

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