राज्य के कई अस्पतालों में नहीं है आईसीयू, जानिए महालेखाकार ने ऑडिट रिपोर्ट में क्या कहा

राज्य के कई अस्पतालों में नहीं है आईसीयू, जानिए महालेखाकार ने ऑडिट रिपोर्ट में क्या कहा

रांची : राज्य के कई अस्पतालों में नहीं है आईसीयू, जानिए महालेखाकार ने ऑडिट रिपोर्ट में क्या कहा- महालेखाकार ने

झारखंड राज्य के 6 जिलों के जिला अस्पतालों की रिपोर्ट पेश की है.

इस रिपोर्ट में राज्य में चिकित्सकों, पारा मेडिकल स्टाफ और उपकरण की भारी कमी बताई गई है.

इसके अलावा रामगढ़ में हेपेटाइटिस बी के 410 खुराक बच्चों को इंजेक्शन दिया गया है,

जो एक्सपायर हो गए थे. इसके साथ ही कई दवाएं लैब की जांच में नकली पाई गई है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राज्य के कई अस्पतालों में आईसीयू नहीं है.

पलामू में आईसीयू है लेकिन काम नहीं करता है.

लैब तकनीशियन की कमी है जिसकी वजह से बुनियादी जांच भी नहीं हो पाती है.

सीटी स्कैन मशीन की भारी कमी है. एक्सरे की मशीनें हाई फ्रीक्वेंसी की है जिसकी वजह से मानव शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. महालेखाकार की रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 550 सौ करोड़ की कुल 70 योजनाएं बनाई गई थी, जिसमें मात्र सौ करोड़ तक के ही लगभग कार्य पूर्ण किए गए हैं. बांकी रकम एक्सपायर हो गई है.

सदर अस्पताल में बरती गई लापरवाही

रांची में 500 बेड के सदर अस्पताल के निर्माण में कई तरह की लापरवाही बरती गई. लापरवाही के कारण ही जहां यह अस्पताल 12 वर्ष में भी चालू नहीं हो सका, वहीं ठेकेदारों से निर्माण में देरी होने पर पर्याप्त राशि की वसूली भी नहीं ली जा सकी. महालेखाकार ने अपनी रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख किया है. रिपोर्ट के अनुसार, बीच में निर्माण कार्य रोकने तथा संचालन के लिए निजी क्षेत्र को लाने में विफलता के कारण ही इतने वर्षों में भी यह अस्पताल पूरी तरह चालू नहीं हो सका.

2007 में शुरू हुआ था रांची सदर अस्पताल के नए भवन का निर्माण कार्य

रिपोर्ट के अनुसार, रांची सदर अस्पताल के 500 बेड के नए भवन का निर्माण कार्य 131.14 करोड़ की लागत से अगस्त 2007 में ही शुरू हुआ था. नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड को तीन साल में इसका निर्माण कार्य पूरा करना था जिसे दिसंबर 2012 तक बढ़ाया गया. राज्य सरकार ने जुलाई 2012 में इस अस्पताल का संचालन पीपीपी मोड में करने का निर्णय लिया गया, जिसके लिए इंटरनेशनल फाइनेंस कारपोरेशन को ट्रांजेक्शन एडवाइजर नियुक्त किया गया. साथ ही एनबीसीसी को कहा गया कि जितना निर्माण हो चुका है उतना ही विभाग को हैंडओवर किया जाए ताकि इसका संचालन हो. साथ ही एनबीसीसी को किए गए कार्य के लिए 137.38 करोड़ रुपये का कुल भुगतान किया गया.

रिपोर्ट : प्रोजेश दास

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