रांची: झारखंड विधानसभा में प्राइवेट स्कूलों की फीस नियंत्रण का मुद्दा जोर-शोर से उठा। विधायक प्रदीप प्रसाद ने सदन में प्रश्न उठाते हुए कहा कि राज्य के सभी निजी स्कूलों में एडमिशन फीस, ट्यूशन फीस और डेवलपमेंट फीस एक समान होनी चाहिए, ताकि हर वर्ग के छात्र समान अवसर प्राप्त कर सकें।
इस पर शिक्षा मंत्री जगरनाथ रामदास ने जवाब देते हुए कहा कि निजी विद्यालय स्वतंत्र संस्थान होते हैं और उनकी फीस संरचना उनके प्रबंधन द्वारा तय की जाती है। हालांकि, जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी हुई है, जो फीस से जुड़ी शिकायतों पर कार्रवाई कर सकती है।
विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने इस विषय को गंभीर बताते हुए कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उपायुक्त की अध्यक्षता वाली कमेटी की नियमित बैठकें हों और जनप्रतिनिधियों को पूर्व सूचना दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर फीस नियंत्रण को लेकर न्यायाधिकरण काम नहीं कर रहा है, तो सरकार को इस दिशा में ठोस कानून बनाना चाहिए।
इस बहस के दौरान यह भी सामने आया कि कई निजी स्कूल हर साल री-एडमिशन फीस वसूलते हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ता है। विधायक प्रदीप प्रसाद ने इसे पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार फीस नियंत्रण पर कदम नहीं उठाती, तो गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित रह जाएंगे।
मंत्री रामदास ने विपक्षी नेताओं के सुझाव को स्वीकार करते हुए कहा कि जिला स्तर की कमेटियों को सक्रिय किया जाएगा और फीस निर्धारण में गड़बड़ी करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


















