बेतिया राज संपत्तियों पर नई नीति : 40 साल पुराने कब्जे को स्वामित्व, नए अतिक्रमण पर कार्रवाई

पटना : बिहार सरकार ने ऐतिहासिक बेतिया राज की संपत्तियों के सुव्यवस्थित प्रबंधन, संरक्षण और निपटान के लिए महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाली नियमावली-2026’ का प्रारूप तैयार किया है। यह नियमावली ‘बेतिया राज की संपत्तियों को निहित करने वाला अधिनियम-2024 (बिहार अधिनियम 23-2024)’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बनाई गई है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि बेतिया राज की सभी चल एवं अचल संपत्तियां, जो बिहार राज्य के भीतर व राज्य के बाहर स्थित हैं, उन्हें विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत बिहार सरकार के नियंत्रण में लाया जाएगा ताकि उनका संरक्षण, प्रबंधन और जनहित में उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

नियमावली में पारदर्शी प्रक्रिया का प्रावधान

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नियमावली अधिनियम की धारा-17 के तहत तैयार की गई है, जिसमें आपत्तियों के निपटान की प्रक्रिया, समाहर्ता द्वारा संपत्तियों पर कब्जा लेने की व्यवस्था, संपत्तियों का वर्गीकरण, प्रबंधन, निपटान, अपील और पुनरीक्षण से संबंधित विस्तृत प्रावधान शामिल किए गए हैं। इससे बेतिया राज की संपत्तियों से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और विधिक स्पष्टता सुनिश्चित होगी।

60 दिनों में दर्ज होगी आपत्ति

उन्होंने बताया कि अधिसूचना जारी होने के बाद संबंधित संपत्तियों की जानकारी सार्वजनिक की जाएगी और इच्छुक पक्षकारों को 60 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज करने का अवसर दिया जाएगा। आपत्तियों की सुनवाई के लिए जिला स्तर पर विशेष पदाधिकारी नामित किए जाएंगे, जिन्हें सिविल न्यायालय के समान शक्तियाँ प्राप्त होंगी और वे अधिकतम 90 दिनों के भीतर मामलों का निपटारा करेंगे।

समाहर्ता लेंगे संपत्तियों का प्रभावी कब्जा

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यदि निर्धारित समय में कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती है या आपत्तियाँ खारिज हो जाती हैं, तो समाहर्ता संबंधित संपत्तियों का प्रभावी कब्जा लेने की कार्रवाई करेंगे। कब्जा लेने के बाद संपत्तियों को विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाएगा, जिनमें ऐतिहासिक एवं विरासत संपत्तियाँ, सरकारी कब्जे वाली संपत्तियाँ, वैध पट्टाधारकों के कब्जे वाली संपत्तियाँ तथा बिना दस्तावेज वाले कब्जे शामिल हैं।

एक जनवरी 1986 कट-ऑफ, 40 वर्ष से अधिक कब्जे वालों को राहत

उपमुख्यमंत्री सिन्हा ने स्पष्ट किया कि नियमावली में लंबे समय से रह रहे वैध अधिभोगियों को राहत देते हुए पूर्ण स्वामित्व  रूपांतरण का प्रावधान किया गया है। इसके लिए 40 वर्ष से प्रभावी कब्जे को मानक माना गया है और एक जनवरी 1986 को कट-ऑफ तिथि निर्धारित किया गया है। जो अधिभोगी इस तिथि से पूर्व से कब्जे में हैं और वैध दस्तावेज प्रस्तुत करते हैं, उन्हें निर्धारित राशि का भुगतान कर संपत्ति को पूर्ण स्वामित्व में परिवर्तित करने का अवसर मिलेगा।

कट-ऑफ के बाद कब्जा करने वालों पर सख्त कार्रवाई

उन्होंने कहा कि एक जनवरी 1986 के बाद कब्जा करने वाले अतिक्रमणकारियों के भवन को कमांडियर किया जा सकेगा तथा उनके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी। जिन मामलों में कोई वैध दस्तावेज या दीर्घकालिक कब्जे का प्रमाण नहीं मिलेगा, उन्हें अनधिकृत अधिभोगी मानते हुए बिहार लोक भूमि अतिक्रमण अधिनियम, 1956 के तहत बेदखली की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

ऐतिहासिक विरासत संपत्तियों का होगा संरक्षण

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि बेतिया राज की कई संपत्तियाँ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व की हैं। ऐसी विरासत संपत्तियों के संरक्षण, नवीकरण और सुरक्षा के लिए विशेषज्ञों और पुरातात्विक संस्थानों की तकनीकी सहायता ली जाएगी, ताकि उनकी ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रह सके।

जनहित में होगा संपत्तियों का उपयोग

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इस नियमावली से बेतिया राज की संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, विधिक व्यवस्था और जनहित का संतुलन स्थापित होगा तथा राज्य की बहुमूल्य संपत्तियों का बेहतर उपयोग विकास कार्यों में किया जा सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप सभी आवश्यक प्रशासनिक तैयारियाँ सुनिश्चित की जाएं, ताकि अधिनियम और नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके जिससे राज्य की संपत्तियों की सुरक्षा तथा उनका समुचित उपयोग सुनिश्चित हो।

सर्वेक्षण के अनुसार, विभिन्न जिलों में भूमि की स्थिति (एकड़ में)

पश्चिम चंपारण – 16671.91

पूर्वी चंपारण – 7640.91

सारण – 109.96

सिवान – 7.29

गोपलगंज – 35.58

पटना – 11.49

कुल – 24477.14

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