Ranchi Murder Case: झखराटांड़ में 13 वर्षीय बच्ची की हत्या का सनसनीखेज खुलासा, मुंहबोले भाई पर आरोप

 रांची के रातू क्षेत्र में 13 साल की बच्ची की हत्या का मामला उजागर, मुंहबोले भाई पर हत्या और गुप्त अंतिम संस्कार का आरोप, पुलिस जांच जारी।


Ranchi Murder Case रांची: राजधानी रांची के रातू थाना क्षेत्र स्थित झखराटांड़ से लापता 13 वर्षीय बच्ची राजनंदिनी के मामले में चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। जांच में संकेत मिले हैं कि 13 मार्च की रात ही उसकी हत्या कर दी गई थी और शव को एंबुलेंस से गयाजी ले जाकर गुप्त रूप से अंतिम संस्कार कर दिया गया। हालांकि पुलिस की ओर से इस मामले में आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है।

Ranchi Murder Case:हत्या के बाद रची गई लापता होने की कहानी

जांच में सामने आया है कि बच्ची के मुंहबोले भाई राहुल उर्फ अक्षय पर हत्या का आरोप है। घटना के बाद आरोपी परिवार तीन दिनों तक घर से गायब रहा। 16 मार्च को लौटने के बाद बच्ची के लापता होने की कहानी गढ़ी गई। इतना ही नहीं, शक से बचने के लिए बंद कमरे में गरुड़ पुराण का पाठ भी कराया गया, ताकि किसी को संदेह न हो।


Key Highlights

  • रांची के रातू में 13 वर्षीय बच्ची की हत्या का खुलासा

  • मुंहबोले भाई पर हत्या का आरोप, पिता-पुत्र गिरफ्तार

  • शव को एंबुलेंस से गयाजी ले जाकर किया गया अंतिम संस्कार

  • शक से बचने के लिए रची गई लापता होने की कहानी

  • पुलिस जांच जारी, एक आरोपी अब भी फरार


Ranchi Murder Case:एंबुलेंस से ले जाकर किया गया अंतिम संस्कार

मामले में यह भी जानकारी मिली है कि हत्या के बाद शव को एंबुलेंस से गयाजी ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस ने एंबुलेंस को जब्त कर लिया है और चालक से पूछताछ की जा रही है। कमलेश मेमोरियल अस्पताल का संचालक, जिसने अंतिम संस्कार में मदद की थी, फिलहाल फरार बताया जा रहा है।

Ranchi Murder Case:पिता-पुत्र गिरफ्तार, जांच जारी

ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर के नेतृत्व में हुई जांच के बाद आरोपी सुबोध पाठक और उसके पुत्र अक्षय पाठक को गिरफ्तार कर लिया गया है। एंबुलेंस चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। पुलिस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए आगे की जांच में जुटी है।

Ranchi Murder Case:आठ वर्षों से उसी परिवार के साथ रह रही थी बच्ची

राजनंदिनी मूल रूप से औरंगाबाद जिले के अंबा गांव की रहने वाली थी। उसके पिता दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर हैं। इसी कारण परिचित सुबोध पाठक उसे अपने साथ रांची ले आए थे। पिछले करीब आठ वर्षों से वह उसी परिवार के साथ रह रही थी और उन्हें अपना परिवार मानती थी। यहां तक कि उसके आधार कार्ड में भी पिता के स्थान पर सुबोध पाठक का नाम दर्ज कराया गया था।

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