पटना: 01 दिसंबर को राजधानी पटना के 12 ऑनलाइन परीक्षा सेंटर में से तीन सेंटर पर सीएचओ परीक्षा की दूसरी पाली के दौरान अचानक बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (एओयू) ने छापेमारी की। छापेमारी के दौरान इओयू की टीम ने कुल 37 लोगों को गिरफ्तार भी किया था। मामला सामने आने के बाद राज्य में एक बार फिर से पेपर लीक की एक नई कहानी सामने आई।
इओयू के जांच में पाया गया कि परीक्षा सेंटर पर अभ्यर्थी अपना बायोमेट्रिक लगा कर प्रवेश किये और उन्हें आवंटित कंप्यूटर पर भी उन्होंने अपना लॉग इन किया लेकिन परीक्षा अभ्यर्थी के बदले कोई और दे रहा था। इओयू की जांच में यह पता चला कि कंप्यूटर को रिमोट कंट्रोल में लेकर माफिया गैंग के सदस्य प्रश्न हल कर रहे थे। इओयू ने सभी 37 लोगों को गिरफ्तार कर जब छानबीन शुरू की तो पेपर लीक का बड़ा खेल सामने आया है।
इओयू की जांच में सामने आया है कि जिस कंपनी को परीक्षा आयोजन की जिम्मेदारी दी गई थी उसने ही सभी 12 सेंटरों को करोड़ों रूपये में बेच दिया था और सभी 12 सेंटरों पर कुछ छात्रों के प्रश्न पत्र को गलत तरीके से माफियाओं ने हल किया था। मामले में इओयू ने नौ अभ्यर्थियों को भी गिरफ्तार किया है। जांच के बाद इओयू ने 46 ओगों को अभियुक्त बनाते हुए मामला दर्ज किया है। मामले में मुख्य अभियुक्त वैशाली के जंदाहा थाना क्षेत्र के भातंडीपुर गांव निवासी विश्वजीत कुमार को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है।
इओयू ने अपने जांच में सेंटर में अलग से रखा एक लैपटॉप भी बरामद किया है जो लीज लाइन से जुड़ा हुआ था और उसके माध्यम से सॉल्वर गैंग प्रश्नपत्र हल कर रहे थे। इओयू की जांच में परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनी के साथ ही परीक्षा सेंटरों के मालिक, आईटी मैनेजर समेत कई कर्मी की संलिप्तता भी पाई गई है। इओयू मामले में लगातार जांच कर रहा है और इओयू के राडार पर अभी कई और अभ्यर्थी हैं।
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