DGP ने कहा- बिहार में 2 साल में शुरू होंगी 9 नई फोरेंसिक लैब

पटना : आपराधिक मामलों में वैज्ञानिक जांच की बढ़ती भूमिका पर जोर देते हुए बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार ने मंगलवार को कहा कि अगले एक से दो साल में बिहार में नौ और विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) कार्यरत हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल में बिहार में चार क्षेत्रीय विधि प्रयोगशाला कार्यरत हैं।

अभी राज्य में 4 एफएसएल काम कर रहे हैं – DGP विनय कुमार

डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि अभी राज्य में चार एफएसएल काम कर रहे हैं। ये चारों एफएसएल पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और राजगीर स्थित बिहार पुलिस अकादमी में स्थापित हैं। नौ और क्षेत्रीय एफएसएल की बिल्डिंग बनकर तैयार है। इसके अलावा, 102 असिस्टेंट डायरेक्टर और सीनियर साइंटिफिक असिस्टेंट की नियुक्ति की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।

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DGP विनय कुमार ने ‘सैटेलाइट कॉन्फ्रेंस ऑन बायोलॉजिकल साइंसेज’ को संबोधित कर रहे थे

डीजीपी विनय कुमार मंगलवार को राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला, सीआईडी पटना द्वारा विधि विज्ञान सेवा निदेशालय (DFSL) और केन्द्रीय गृह मंत्रालय के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित दो दिवसीय ‘सैटेलाइट कॉन्फ्रेंस ऑन बायोलॉजिकल साइंसेज’ को संबोधित कर रहे थे। इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन राजधानी पटना के सरदार पटेल भवन स्थित बिहार पुलिस मुख्यालय में किया जा रहा है, जहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ, देश के सभी राज्यों के एफएसएल और केन्द्रीय एफएसएल के वैज्ञानिक और अन्य विशेषज्ञ इस वर्कशॉप में हिस्सा ले रहे हैं। इस मौके पर विधि विज्ञान सेवा निदेशालय, नई दिल्ली के निदेशक सह मुख्य विधि विज्ञान वैज्ञानिक एसके जैन, उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ़ फोरेंसिक साइंस के डायरेक्टर जीके गोस्वामी, सीआईडी के अपर पुलिस महानिदेशक पारसनाथ और पटना के विधि विज्ञान प्रयोगशाला के निदेशक हिंजय कुमार मौजूद थे।

DGP ने कहा- BNS के पारित होने के बाद आपराधिक वारदातों की वैज्ञानिक जांच की भूमिका काफी बढ़ गयी है

डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) के पारित होने के बाद आपराधिक वारदातों की वैज्ञानिक जांच की भूमिका काफी बढ़ गयी है। बीएनएसएस के मुताबिक, जिन अपराधों में सात साल या उससे अधिक की सज़ा हो सकती है, उनके लिए ऑफिसर-इन-चार्ज को यह पक्का करना होगा कि सबूत इकट्ठा करने के लिए कम से एक फोरेंसिक एक्सपर्ट अपराध स्थल पर जाए। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में पिछले दो दशकों में बड़े पैमाने पर विधि विज्ञान की बुनियादी सुविधाओं का विकास हुआ है।

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‘हम वर्ष 2012-13 में मुश्किल से 700 से 800 मामलों में ही एफएसएल की सेवा उपलब्ध करा पाते थे’

उन्होंने कहा कि हम वर्ष 2012-13 में मुश्किल से 700 से 800 मामलों में ही एफएसएल की सेवा उपलब्ध करा पाते थे, लेकिन अब हम 18,000 आपराधिक मामलों में विधि विज्ञान प्रयोगशाला की सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। तब राज्य में विधि विज्ञान प्रयोगशाला में वैज्ञानिकों की संख्या महज दो अंकों में ही थी। उन्होंने कहा कि पॉक्सो के मामलों में डीएनए की जांच अब जरूरी कर दी गई है और राज्य में सिर्फ एक डीएनए लैब उपलब्ध है जो जरूरतों को पूरा करने में असमर्थ है।

 

DFSL से अनुरोध करता हूं कि वह राज्य में तीन-चार DNA लैब स्थापित करने में बिहार पुलिस को अपना सहयोग दें – DGP

विनय कुमार ने कहा कि मैं डीएफएसएस से अनुरोध करता हूं कि वह राज्य में तीन-चार डीएनए लैब स्थापित करने में बिहार पुलिस को अपना सहयोग दे। डीएफएसएस बिहार को निर्भया फंड या किसी अन्य फंड से वित्तीय सहायता कर सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य के कुल 28 जिलों में डिस्ट्रिक्ट मोबाइल लैबोरेटरीज के लिए भवन निर्माण का काम पूरा हो चुका है। वैज्ञानिकों की नियुक्ति के बाद उन्हें चालू कर दिया जाएगा।

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