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Jharkhand Sand Crisis: एनजीटी प्रतिबंध से पहले बालू की जमाखोरी तेज, रांची में कीमतें 9 हजार रुपये तक पहुंचीं

झारखंड में 10 जून से बालू खनन पर एनजीटी की रोक से पहले जमाखोरी और मुनाफाखोरी बढ़ गई है। रांची में बालू की कीमतें 9 हजार रुपये प्रति 100 सीएफटी तक पहुंच गई हैं।


Jharkhand Sand Crisis रांची: झारखंड में मानसून और एनजीटी की प्रस्तावित रोक से पहले बालू को लेकर संकट गहराने लगा है। 10 जून से नदियों से बालू खनन पर रोक लगने वाली है, जिसके चलते राज्य के विभिन्न इलाकों में बालू की जमाखोरी और मुनाफाखोरी तेजी से बढ़ रही है। राजधानी रांची सहित आसपास के जिलों में निर्माण कार्य से जुड़े लोगों को बालू की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, बालू कारोबारी और सिंडिकेट से जुड़े लोग बड़े पैमाने पर बालू का स्टॉक जमा करने में लगे हुए हैं। इसका सीधा असर बाजार कीमतों पर देखने को मिल रहा है।

Jharkhand Sand Crisis:श्यामनगर घाट को अनुमति, लेकिन खनन अब तक शुरू नहीं

रांची के श्यामनगर बालू घाट से बालू उत्खनन की अनुमति प्रदान कर दी गई है। पर्यावरण स्वीकृति के साथ-साथ संचालन संबंधी आवश्यक अनुमति भी जारी की जा चुकी है। इसके बावजूद घाट से विधिवत तरीके से बालू का उत्खनन शुरू नहीं हो पाया है।

स्थिति यह है कि आम लोगों को बालू कब और किस प्रक्रिया से उपलब्ध होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं है। प्रशासनिक स्तर पर भी संचालन व्यवस्था को लेकर स्थिति साफ नहीं हो सकी है। जिला खनन कार्यालय के अनुसार एग्रीमेंट के बाद घाट का संचालन किस एजेंसी या संस्था के माध्यम से किया जाएगा, इसकी जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।


Key Highlights

  • 10 जून से नदियों से बालू खनन पर एनजीटी की रोक लागू होगी।

  • रांची समेत कई क्षेत्रों में बालू की कृत्रिम किल्लत शुरू।

  • 100 सीएफटी बालू की कीमत 8 से 9 हजार रुपये तक पहुंची।

  • श्यामनगर बालू घाट को अनुमति मिली, लेकिन खनन शुरू नहीं हुआ।

  • अवैध स्टॉकिंग और मुनाफाखोरी पर प्रशासन की निगरानी पर सवाल।


Jharkhand Sand Crisis:बालू की कीमतों में भारी उछाल

बालू की कमी का लाभ उठाकर जमाखोरी और मुनाफाखोरी का खेल शुरू हो गया है। पहले जहां 100 सीएफटी बालू 4500 से 5000 रुपये के बीच उपलब्ध था, वहीं अब इसकी कीमत 8000 से 9000 रुपये तक पहुंच गई है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार बिहार के चालान के नाम पर रांची, लोहरदगा, पतरातू और खूंटी क्षेत्र से कथित रूप से अवैध बालू लाकर उसका भंडारण किया जा रहा है। बाजार में बढ़ी मांग और सीमित उपलब्धता के कारण कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।

Jharkhand Sand Crisis:स्टॉकिंग को लेकर भी उठ रहे सवाल

प्रदूषण नियंत्रण पर्षद की ओर से श्यामनगर घाट के ठेकेदार समर्थ एड प्रोटेक्स को गाड़ीहलमाद क्षेत्र में बालू भंडारण के लिए आवश्यक अनुमति प्रदान की गई है। हालांकि आरोप है कि औपचारिक स्वीकृति मिलने से पहले ही संबंधित स्थल पर लाखों सीएफटी बालू का स्टॉक जमा कर लिया गया था।

यह भी सवाल उठ रहा है कि उत्खनन की आधिकारिक अनुमति से पहले इतनी बड़ी मात्रा में बालू कहां से आया और उसका भंडारण किसके द्वारा किया गया। इस संबंध में प्रशासन के पास भी स्पष्ट जानकारी नहीं बताई जा रही है।

Jharkhand Sand Crisis:प्रशासनिक निगरानी पर उठे सवाल

बालू की बढ़ती कीमतों और कथित जमाखोरी के बीच फिलहाल मुनाफाखोरी रोकने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नजर नहीं आ रही है। निर्माण कार्यों से जुड़े लोग और आम उपभोक्ता बढ़ती लागत से परेशान हैं, जबकि बाजार में पारदर्शी आपूर्ति व्यवस्था की मांग तेज हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते निगरानी और नियंत्रण के उपाय नहीं किए गए, तो मानसून के दौरान बालू संकट और अधिक गहरा सकता है।

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