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 Jharkhand Sand Mining: Jharkhand में बालू का अवैध कारोबार जारी, 17 हजार टन बालू तीन महीने में जब्त

 एनजीटी की रोक के बावजूद झारखंड में बालू का अवैध उठाव जारी है। तीन महीने में 17 हजार टन से अधिक बालू जब्त हुआ। सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा है।


 Jharkhand Sand Mining रांची: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने 10 जून से 15 अक्तूबर तक बालू खनन पर रोक लगा रखी है। इसके बावजूद झारखंड के कई जिलों में बालू घाटों से अवैध तरीके से बालू का उठाव और बाजार में बिक्री जारी है। रांची, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला समेत कई जिलों में पोकलेन और जेसीबी जैसी भारी मशीनों से बालू उठाव की शिकायतें सामने आ रही हैं। वैध रूप से बंदोबस्त बालू घाटों का संचालन नहीं होने से अवैध कारोबारियों को इसका फायदा मिल रहा है।

 Jharkhand Sand Mining:तीन महीने में 17 हजार टन से अधिक बालू जब्त

खनन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच राज्य में 1,32,551.43 टन बालू पकड़ा गया। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती तीन महीनों यानी अप्रैल से जून 2026 के दौरान ही 17,296.28 टन बालू जब्त किया गया। इससे राज्य में बालू के अवैध खनन और कारोबार की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

रांची जिले में भी कांची नदी और राहे क्षेत्र की राहू नदी के घाटों से एनजीटी की रोक के दौरान अवैध बालू उठाव की शिकायत सामने आयी है। बताया गया कि संबंधित तस्वीरें 14 अगस्त को ली गयी थीं। अवैध खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए प्रशासन और खनन विभाग की ओर से समय-समय पर छापेमारी अभियान भी चलाया जाता है।


Key Highlights

  • एनजीटी ने 10 जून से 15 अक्तूबर तक बालू खनन पर रोक लगा रखी है।
  • अप्रैल से जून 2026 के बीच 17,296.28 टन बालू जब्त किया गया।
  • राज्य में 444 श्रेणी-दो बालू घाट चिह्नित हैं, जिनमें 290 की नीलामी हो चुकी है।
  • झारखंड विधानसभा की समिति ने पारदर्शी व्यवस्था से 4,500 करोड़ रुपये तक सालाना राजस्व की संभावना जतायी है।
  • 15 अक्तूबर के बाद कुछ बंदोबस्त बालू घाटों के शुरू होने की संभावना है।

 Jharkhand Sand Mining:444 घाटों में 290 की नीलामी, फिर भी ज्यादातर बंद

झारखंड विधानसभा की आंतरिक संसाधन एवं केंद्रीय सहायता समिति की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में कुल 820 बालू घाट चिह्नित हैं। इनमें 376 श्रेणी-एक के घाट हैं, जिनका संचालन ग्राम पंचायतों द्वारा किया जाता है। वहीं 444 श्रेणी-दो के घाट हैं, जिनका संचालन खान विभाग को करना है।

श्रेणी-दो के 444 घाटों में से 290 की नीलामी हो चुकी है, लेकिन उनका संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। इनमें 35 घाट ऐसे हैं, जिनकी ग्रामसभा और अन्य प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और उन्हें पहले से पर्यावरण स्वीकृति भी मिल चुकी है। इन 35 घाटों में 17 का लीज डीड भी पूरा हो चुका है, लेकिन केवल 14 घाटों से ही बालू उठाव शुरू हो पाया है।

Jharkhand Sand Mining:पारदर्शी व्यवस्था से 4,500 करोड़ तक राजस्व की संभावना

विधानसभा की आंतरिक संसाधन एवं केंद्रीय सहायता समिति ने अनुमान लगाया है कि बालू घाटों की पारदर्शी नीलामी और बेहतर संचालन से राज्य को प्रत्यक्ष रूप से करीब 2,250 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है। आगे चलकर यह राशि 4,500 करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच सकती है।

बालू की जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 24 जिलों में कुल 269.89 करोड़ सीएफटी खनन योग्य बालू उपलब्ध है। इन जिलों में कुल 5,315.46 हेक्टेयर चालू घाट क्षेत्र चिह्नित किया गया है। नये झारखंड सैंड माइनिंग रूल्स 2025 के तहत सरकारी रॉयल्टी 22 रुपये प्रति सीएफटी निर्धारित है। उपलब्ध कुल खनन योग्य बालू पर इस दर से संभावित राजस्व करीब 5,937 करोड़ रुपये सालाना बैठता है।

रांची जिले में 19 बालू घाटों की नीलामी पूरी हो चुकी है। अधिकारियों के अनुसार अब संबंधित कंपनियों को घाट चालू करना है। 15 अक्तूबर के बाद इनमें से कुछ घाटों के शुरू होने की संभावना जतायी गयी है। प्रशासन का कहना है कि अवैध बालू खनन रोकने के लिए टास्क फोर्स के साथ छापेमारी की जा रही है और कई स्थानों से अवैध बालू जब्त किया गया है।

 

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