रांची : JLKM ने झारखंड स्टेट फार्मेसी काउंसिल में बाहरी एवं गैर-सरकारी व्यक्तियों की नियुक्तियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने स्पष्ट आरोप लगाया है कि फार्मेसी काउंसिल भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी है, जहां झारखंडी मूल के फार्मासिस्टों की अनदेखी कर बाहरी लोगों को कुर्सियों पर बैठाया जा रहा है। JLKM ने ऐलान किया है कि हर कुर्सी पर झारखंडियों को बैठाने की आरपार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
JLKM ने आरोप लगाया कि झारखंड में करीब 120 फार्मेसी कॉलेजों में से अधिकतर कागज़ पर ही संचालित हो रहे हैं। इन कॉलेजों को फार्मेसी काउंसिल का संरक्षण प्राप्त है और छात्र-छात्राओं से भारी भरकम राशि की वसूली की जा रही है। मंच ने कहा कि यह झारखंड के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय है और इसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
JLKM प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में राज्यपाल महामहिम सीपी राधाकृष्णन से मिलकर इस गंभीर मामले पर विस्तृत ज्ञापन सौंपा और मांग की कि फार्मेसी काउंसिल के अध्यक्ष, सचिव, रजिस्ट्रार और सभी सदस्यों की नियुक्ति झारखंडी मूल के योग्य फार्मासिस्टों में से की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान रजिस्ट्रार का कार्यकाल 13 अक्टूबर 2024 को समाप्त हो चुका है, फिर भी वे पद पर बने हुए हैं और 500 से अधिक फर्जी रजिस्ट्रेशन किए जाने के आरोपों में घिरे हैं।
JLKM के अनुसार, फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा 42 और क्लॉज 72(2) का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। मंच ने मांग की है कि काउंसिल में चल रही नियुक्ति प्रक्रिया को रोका जाए और पांच मनोनीत सदस्यों में से कोई भी गैर-सरकारी या गैर-झारखंडी न हो। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि अल्पसंख्यक समाज से आने वाले पदों पर भी बाहरी मुस्लिम समाज के लोगों को बैठाने की साजिश हो रही है, जिससे झारखंड के मूलवासी और आदिवासी समुदाय पूरी तरह से वंचित हो रहे हैं।
मंच ने चुनाव प्रक्रिया की भी जांच की मांग की है और कहा कि पिछले चुनावों में पारदर्शिता नहीं बरती गई थी। पत्राचार आधारित चुनावों में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल हुआ है, जिसकी कोई वैधता काउंसिल नहीं दे पा रही है।
राज्यपाल से हुई मुलाकात के बाद JLKM को भरोसा है कि अब इस मामले में उचित कार्रवाई होगी। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। JLKM ने दोहराया कि झारखंड राज्य के गठन का उद्देश्य ही यह था कि यहां के मूलवासी और आदिवासी समुदाय को न्याय मिले, लेकिन वर्तमान में उनकी उपेक्षा की जा रही है।
JLKM के मुताबिक, वे अब यह सुनिश्चित करेंगे कि फार्मेसी काउंसिल की हर कुर्सी पर झारखंड का बेटा या बेटी बैठे — ताकि शोषण, भ्रष्टाचार और बाहरी वर्चस्व को रोका जा सके।


