सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव से दागा सवाल- किस साइज में दिया माफी का विज्ञापन ?

डिजीटल डेस्क : सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बाबा रामदेव से पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन से जुड़े अवमानना के मामले की सुनवाई करते हुए सवाल दागा कि आपने किस साइज में विज्ञापन दिया है, एक सप्ताह बाद कल (सोमवार 22 अप्रैल 2024)क्यों दिया गया और मांगी गई सार्वजनिक माफी वाले विज्ञापन का आकार क्या आपके सभी विज्ञापनों में समान है ?

न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर रियायत देने का फैसला नहीं किया है। बेंच ने प्रकाशित माफीनामा कोर्ट में दाखिल करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट को पतंजलि ने बताया कि 10 लाख का प्रकाशित किया माफीनामा

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच के सामने मंगलवार को सुनवाई के दौरान बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण कोर्ट में मौजूद हैं। बेंच के सवालों के जवाब में पतंजलि की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि हमने एक माफीनामा प्रकाशित किया है। इसकी कीमत 10 लाख रुपये है।

पिछली तारीख पर कोर्ट में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के वकील ने सार्वजनिक माफी प्रकाशित करने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगने के बाद पतंजलि ने अखबार में माफीनामा प्रकाशित कर माफी मांगी है। अखबार में सोमवार को माफीनामा का विज्ञापन दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने बचाव में उतरे केंद्र सरकार से भी पूछा सवाल

न्यायमूर्ति कोहली ने कहा कि आज सूचीबद्ध यह हस्तक्षेपकर्ता कौन है ?  ऐसा लगता है कि वह प्रस्तावित अवमाननाकर्ताओं का समर्थन करना चाहते हैं। वह इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) पर जुर्माना लगाना चाहते हैं। न्यायमूर्ति ने कहा कि हम बहुत उत्सुक हैं,  इस एप्लिकेशन के समय को लेकर। हम जानना चाहते हैं कि यह व्यक्ति कौन है और हमें उसे अपने सामने रखना होगा।

न्यायमूर्ति कोहली ने केंद्र सरकार से कहा कि अब आप नियम 170 को वापस लेना चाहते हैं। यदि आपने ऐसा निर्णय लिया है, तो आखिर क्या हुआ? आप केवल उस कानून के तहत कार्य करना क्यों चुनते हैं, जिसे उत्तरदाताओं ने पिछड़ा हुआ कहा है?  बेंच ने केंद्र से कहा कि आपने भ्रामक विज्ञापन के मामले में क्या कदम उठाया है, हमें बताएं।

सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते का दिया था समय

सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के भ्रामक विज्ञापन मामले में सुनवाई के लिए 23 अप्रैल की तारीख तय की थी। इससे पहले 19 अप्रैल को सुनवाई हुई थी। तब अदालत ने योग गुरु रामदेव, उनके सहयोगी बालकृष्ण और पतंजलि आयुर्वेद को भ्रामक विज्ञापन मामले में सार्वजनिक तौर पर माफी मांगने के लिए एक सप्ताह का समय दिया था। सुनवाई के दौरान रामदेव और बालकृष्ण दोनों मौजूद थे और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से शीर्ष अदालत से बिना शर्त माफी मांगी थी।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण से सीधे बात की थी। बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने कहा था कि आयुर्वेद के प्रति उत्साह के चलते विज्ञापन किए, कानून की जानकारी नहीं थी।

सुप्रीम कोर्ट में बाबा रामदेव ने कहा था – किसी की आलोचना नहीं की

इससे पहले 16 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई हुई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक हफ्ते में बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण अपनी गलती सुधारने को कदम उठाएं। तब बाबा रामदेव ने कहा था कि हमने किसी की आलोचना नहीं की।  तब न्यायमूर्ति जस्टिस कोहली ने कहा था कि हम माफी के बारे में सोचेंगे और अभी हमने माफी नहीं दी है।

साथ ही न्यायमूर्ति ने टिप्पणी की थी कि आप इतने भी नादान नहीं हैं कि आपको कुछ पता ना हो। न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने बालकृष्ण से कहा था, ‘आप अच्छा काम कर रहे हैं लेकिन आप एलोपैथी को नीचा नहीं दिखा सकते।’

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