रांची: रांची यूनिवर्सिटी में पीएचडी कोर्स में प्रवेश के लिए आयोजित की गई 2023 की प्रवेश परीक्षा में अनियमितताओं और मानकों की अनदेखी को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। परीक्षा में गड़बड़ियों के विरोध में अभ्यर्थियों ने पिछले साल एक सप्ताह तक तालाबंदी की थी। इसके बाद विवि ने अभ्यर्थियों से आपत्तियां आमंत्रित की थीं, लेकिन करीब 300 आवेदन अब तक लंबित हैं।
2024 पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया शुरू, पुरानी आपत्तियां unresolved
मंगलवार को प्रभारी परीक्षा नियंत्रक डॉ. विकास ने बताया कि पीएचडी प्रवेश परीक्षा-2024 के लिए आवेदन प्रक्रिया यूजीसी नियमों के अनुसार शुरू कर दी गई है। परीक्षा शुल्क दो हजार रुपए निर्धारित किया गया है। परीक्षा 70 अंकों की लिखित और 30 अंकों के वाइवा पर आधारित होगी। निगेटिव मार्किंग भी लागू रहेगी।
इस दौरान एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष अमन अहमद के नेतृत्व में छात्रों ने परीक्षा नियंत्रक से मुलाकात की और 2023 की प्रवेश परीक्षा की आपत्तियों के लंबित रहने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने मांग की कि 300 आवेदन का जल्द निराकरण किया जाए।
प्रशासन से नहीं मिला संतोषजनक जवाब, छात्रों ने चिपकाए ‘वीसी लापता’ के पोस्टर
परीक्षा नियंत्रक ने पिछली परीक्षा की आपत्तियों पर असमर्थता जताते हुए छात्रों को कुलपति से मिलने का सुझाव दिया। जब एनएसयूआई सदस्यों को मुख्यालय में कुलपति नहीं मिले, तो उन्होंने प्रशासनिक भवन के विभिन्न हिस्सों में ‘वीसी लापता’ के पोस्टर चिपका दिए।
छात्रों का कहना है कि पिछली प्रवेश परीक्षा में कई अभ्यर्थियों ने उत्तर पुस्तिका देखने के बाद पास होने का दावा किया था, लेकिन आज तक उनका रिजल्ट जारी नहीं हुआ है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन तेज करेंगे।


















