रांची: झारखंड सरकार ने डीएसपीएमयू का नाम बदलकर वीर शहीद बुधू भगत यूनिवर्सिटी करने की सैद्धांतिक सहमति दे दी है। गुरुवार को विधानसभा में उच्च तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने इस निर्णय की घोषणा की।
शहीदों को सम्मान देने की पहल
मंत्री ने कहा कि यदि सरकार अपने शहीदों को सम्मान नहीं देगी, तो कौन देगा? उन्होंने यह भी सवाल किया कि बिहार और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में कितने विश्वविद्यालय शहीदों के नाम पर हैं। उन्होंने कहा कि शहीदों के नाम पर विश्वविद्यालय होने से राज्य के छात्रों को अपने इतिहास और स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को जानने का अवसर मिलेगा।
यह मांग झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) विधायक विकास मुंडा ने गैर सरकारी संकल्प के माध्यम से उठाई थी। गौरतलब है कि 2017 में भाजपा सरकार ने राज्य के सबसे पुराने रांची कॉलेज को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी के रूप में स्थापित किया था।
मातृभाषा में पढ़ाई के लिए शिक्षकों की होगी नियुक्ति
इस दौरान स्कूली शिक्षा मंत्री रामदास सोरेन ने विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार जल्द ही पंचायत स्तर पर सर्वे कराकर स्कूलों में मातृभाषा की पढ़ाई शुरू करने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति करेगी।
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा दी जाती है, और इसी मॉडल का अध्ययन करने के लिए राज्य सरकार ने एक पांच सदस्यीय कमेटी बनाई थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट शिक्षा विभाग को सौंप दी है और जल्द ही इसे मुख्यमंत्री को प्रस्तुत किया जाएगा। मुख्यमंत्री के निर्णय के बाद शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
यह मुद्दा कांग्रेस विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने गैर सरकारी संकल्प के माध्यम से उठाया था। उन्होंने प्राथमिक, मिडिल और उच्च विद्यालयों में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ाई को अनिवार्य करने तथा शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की थी।


















