रांची: अधिवक्ता और सोशल एक्टिविस्ट राजीव कुमार ने राज्य सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ईडी के पत्र पर कार्रवाई नहीं कर रही। ईडी ने कई मामलों को लेकर राज्य के अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए पत्र लिखा लेकिन राज्य सरकार ने कार्रवाई नहीं की।
राजीव कुमार ने कहा कि 2021 के बाद झारखंड राज्य में परिवर्तन निदेशालय ईडी एक्टिव हुआ। इसके बाद मनरेगा घोटाला, माइनिंग घोटाला, जमीन घोटाला समेत अन्य घोटालों की जांच ईडी कर रही है। लेकिन ईडी की भी कुछ बाध्यता है। ईडी उन्हीं मामलों की जांच कर सकती है, जिसमें केसेस पेंडिंग है या चार्जशीट फाइल हो गया है।
झारखण्ड में किसी भी ऑफिसर्स के खिलाफ जो भी मामले दर्ज हो रहे हैं, उनमें शेड्यूल ऑफेन्स का सेक्शन नहीं जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मौखिक रूप से हिदायत दी है कि इन मामलों में शेड्यूल ऑफेन्स का सेक्शन न डालें। ईडी ने कई मुद्दों को लेकर PMLA 66 (2) के तहत राज्य सरकार को पत्र लिखा है। जांच के दौरान ईडी को कई सबूत मिले हैं कि कई मामलों में पेंडिंग क्रिमिनल केसेस में आगे बढ़ाना चाहिए था। लेकिन राज्य सरकार ने आगे नहीं बढ़ाया।
उन्होंने बताया कि पूजा सिंघल से जुड़े मनरेगा घोटाला मामले में खूंटी में 13 से 14 मामले दर्ज हुए। जांच की प्रक्रिया जूनियर इंजीनियर तक बढ़ी। इस मामले में पूजा सिंघल से कभी पूछताछ नहीं हुई। जब रेड हुआ तब पता चला कि इसमें पूजा सिंघल को पांच प्रतिशत कमीसन जाता था।
ये जांच क्रिमिनल ऑफेन्स के तहत कभी नहीं हुई। मामले में PMLA 66 (2) के तहत ईडी ने जब 18 नवंबर 2022 को पत्र लिखा तभी भी जांच आगे नहीं बढ़ी। राज्य सरकार ने ईडी के पत्र का अनुपालन नहीं किया। जो कि राज्य सरकार का दायित्व है। वीरेंद्र राम मामले में एफआईआर तब हुआ जब एसीबी की ओर से रेड हुआ और 2 करोड़ 40 लख रुपए बरामद किया गया। मिलने के बाद भी उसमें इनकम टैक्स को जानकारी नहीं दी गई। मामले में एफआईआर हुआ लेकिन जांच की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। इसी मामले में जब ईडी ने रेड किया तब लगभग 40 करोड़ की प्रोपर्टी का पता चला।
जमीन घोटाले मामले में भी रांची के बरियातू थाना मामले में मामला दर्ज किया गया। इस मामले में भी ईडी ने पत्र लिखा। उसी प्रकार से आईएएस राजीव अरुण एक्का मामले में भी ईडी ने राज्य सरकार से जानकारी साझा की लेकिन उस मामले में उन्हें राज्य सरकार ने क्लीन चीट दे दिया।
उन्होंने कहा कि इन मामलों को लेकर अगर कोई भी बोलता है, तो उस पर एसटी-एससी का केस फाइल करवा दिया जाता है। राज्य सरकार की ऐजेंसी काम नहीं करती और दूसरे एजेंसी को काम नहीं करने देते।
राज्य के 24 साल हो गए लेकिन कभी नहीं सुना कि एसीबी ने किसी ऑफिसर के यहां रेड की हो। अगर PMLA 66 (2) का अनुपालन नहीं हुआ तो आगे भी कुछ नहीं होगा। उन्होंने कहा 12 साल बाद भी जेपीएससी पहला और दूसरा का लेकिन सीबीआई ने अभी तक चार्जशीट फ़ाइल नहीं किया और अधिकारी अभी भी बैठ कर लूट रहे हैं।


















