रांची:रांची विश्वविद्यालय से संबद्ध इंटरमीडिएट कॉलेजों में नामांकन बंद होने के बाद से बेरोजगार हुए लगभग 800 शिक्षक और कर्मचारी आज अपनी पीड़ा लेकर राजभवन के समक्ष एकत्र हुए। इन शिक्षकों ने राज्यपाल से मुलाकात कर मांग की कि या तो उन्हें समायोजित किया जाए या इंटरमीडिएट में नामांकन प्रक्रिया पुनः प्रारंभ कर उन्हें रोजगार प्रदान किया जाए।
शिक्षक अमित कुमार, जो पिछले 15 वर्षों से इंटर कॉलेज में सेवा दे रहे हैं, ने बताया, “हम लोग कॉलेजों में पढ़ाने के साथ-साथ हर चुनावी प्रक्रिया में भी सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं। लेकिन पिछले सत्र से नामांकन बंद है, जिससे हम सभी बेरोजगार हो गए हैं।”
उन्होंने आरोप लगाया कि रांची विश्वविद्यालय प्रशासन की नीतियां भ्रमित करने वाली रही हैं। “पहले पत्र निकालते हैं कि नामांकन होगा, फिर एक सप्ताह में ही उसे रद्द कर देते हैं। आखिर हम शिक्षकों के भविष्य से इस तरह का खिलवाड़ कब तक चलेगा?”
शिक्षकों ने यह भी कहा कि अधिकांश छात्र ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं और अंगीभूत कॉलेजों में कम खर्च में शिक्षा प्राप्त करते हैं। यदि इंटरमीडिएट स्तर पर नामांकन बंद रहेगा, तो इन विद्यार्थियों की शिक्षा भी प्रभावित होगी।
राजभवन से मिलने के बाद शिक्षकों ने बताया कि राज्यपाल ने उन्हें आश्वस्त किया है कि वे मामले की गंभीरता को समझते हैं और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
हालांकि, शिक्षकों का कहना है कि यदि शीघ्र कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे अनिश्चितकालीन आंदोलन और अनशन की राह अपनाएंगे।
“हमने मुख्यमंत्री से चार बार मुलाकात की, हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। अब सब्र का बांध टूट रहा है। अगर सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया, तो हम सड़क पर उतरेंगे,” – एक अन्य शिक्षक ने स्पष्ट कहा।
इस संकट ने न केवल इन शिक्षकों की आजीविका छीनी है, बल्कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को भी चरमरा दिया है। “हम लोग फरवरी से बेरोजगार हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च – सब कुछ ठप हो गया है,” – एक महिला शिक्षिका ने कहा।
अब यह देखना होगा कि राज्यपाल के हस्तक्षेप से सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कोई त्वरित और ठोस समाधान निकालती है या नहीं। शिक्षकों की निगाहें अब पूरी तरह राजभवन और मंत्रालय की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।


















