CID जांच से पहले JSSC का प्रेस कॉन्फ्रेंस जांच को प्रभावित करने की कोशिश-प्रतुल शाहदेव…

Ranchi : बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने इस बात पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया कि एक तरफ सीएम ने कल सीजीएल परीक्षा की सीआईडी जांच के आदेश दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ आज JSSC ने सीजीएल परीक्षा को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए खुद को क्लीन चिट दे दी है। यह सीधे तौर पर सीएम के द्वारा CID जांच के आदेश को प्रभावित करने का मामला प्रतीत होता है।

मामला और संदिग्ध हुआ, सीएम अब सीबीआई जांच की अनुशंसा करें

प्रतुल ने कहा यह हड़बड़ी पूरे मसले को और भी संदिग्ध बनाता है। ये सारे तथ्य JSSC CID जांच के क्रम में जांच अधिकार को बताती तो बेहतर होता। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कमीशन सीधे तौर पर पब्लिक ओपिनियन बनाने का और जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। अब सीएम को पहल करते हुए CID जांच की अनुशंसा करनी चाहिए।

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आगे उन्होंने कहा कि सीजीएल परीक्षा में बड़े आरोप लगे हैं। पहली बार जब परीक्षा ली गई थी तो व्हाट्सएप में 25 लाख रुपए में प्रश्न पत्र लीक का आरोप लगा था। दूसरी बार फिर से परीक्षा ली गई जिसमें इंटरनेट बंद होने के बावजूद भी छात्रों ने पुरानी परीक्षाओं से प्रश्न पत्र को सीरियल वाइज उतारने के आरोप लगाए और विडंबना देखिए अदालत में मामला विचाराधीन होने के बावजूद भी परीक्षा का परिणाम घोषित कर दिया गया।

किस आधार पर JSSC सिर्फ स्थानीय छात्रों के चयनित होने का दावा कर रही है

उसके बाद हजारीबाग में परीक्षा के परिणाम का विरोध कर रहे हैं छात्रों पर लाठीचार्ज भी किया गया। जब स्थानीयता परिभाषित नहीं है तो फिर किस आधार पर JSSC सिर्फ स्थानीय छात्रों के चयनित होने का दावा कर रही है? JSSC ने दावा किया कि परीक्षा में 80% से भी ज्यादा स्थानीय छात्रों का चयन हुआ है।

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जब सरकार के स्तर पर आज तक स्थानीयता का कट ऑफ डेट परिभाषित नहीं हुआ है तो फिर किस आधार पर JSSC ये दावा कर रही है। सीएम ने तो शत प्रतिशत यहां के आदिवासी-मूलवासी छात्रों को तृतीय और चतुर्थ ग्रेड में नौकरी देने की बात कही थी। राज्यपाल के अभिभाषण में भी यही बात दोहराई गई तो यह आंकड़ा तो शत प्रतिशत होना ही चाहिए था।

JSSC के अधिकारियों को ईमेल से धमकी का मामला गंभीर, उच्चस्तरीय जांच हो

प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि जेएसएससी के अधिकारियों को ईमेल से जो धमकियां मिली है, यह प्रथम दृष्टया बहुत ही गंभीर मामला प्रतीत होता है। इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर जिन अधिकारियों को धमकी दी गई है उनको सरकार सुरक्षा भी मुहैया कराये।

मदन सिंह की रिपोर्ट—

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